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एडवेंचर सेल्फी का क्रेज जिंदगी पर हावी

अभी बीते दिन एडवेंचर सेल्फी रूपी महामारी ने सहारनपुर में दो बच्चों को अपने आगोश में समाहित कर लिया। इस तरीके की हृदय विदारक घटना मन को विचलित करने के साथ झकझोरती भी है। आधुनिकता की आड़ में लोग इतने पागल क्यों हुए जा रहे हैं कि उनका क्रेज उनकी जिंदगी के लिए भारी पड़ रहा है। भारत में मौत का दूसरा नाम दुर्घटनाओं के बाद अब एडवेंचर सेल्फी होता जा रहा हैं।

अमेरिका की कानेर्जी मेलॉन यूनिवर्सिटी और भारत की इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट आॅफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और तिरुचिरापल्ली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए 20 देशों पर शोध में मार्च 2014 से सितंबर 2016 के बीच सर्वाधिक 76 लोगों की मौत भारत में एडवेंचर सेल्फी की वजह से हुई। वहीं इस फेहरिस्त में पाकिस्तान और अमेरिका दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।

शोध में उन 20 देशों को शामिल किया गया था। जहां एडवेंचर सेल्फी का चलन सर्वाधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक एडवेंचर सेल्फी की वजह से हुई दुर्घटना में पाकिस्तान में 9, अमेरिका और फिलीपींस में 8-8 लोगों की मौत हुई। जबकि रूस में 6, स्पेन में 3 और पुर्तगाल, इंडोनेशिया, पेरू और तुर्की में 8 लोगों की मौत एडवेंचर सेल्फी लेने के चक्कर में हुई।

एडवेंचर सेल्फी का क्रेज दरअसल जानलेवा साबित हो रहा है। मौज-मस्ती की चाह और कुछ नया कर गुजरने की ख्वाहिश रखने वाले युवाओं को जान से हाथ धोना पड़ रहा है या फिर दुर्घटना का शिकार होना पड़ता है। यह अजीब विडंबना है कि महज एक सेल्फी का क्रेज युवाओं की जिंदगी को लील रहा है। अब धीरे-धीरे सेल्फी स्टिक के जरिए युवा एडवेंचर सेल्फी को लेकर ज्यादा क्रेजी हो उठे हैं।

इस सेल्फेरिया की जद में पूरी दुनिया के समक्ष भारत ज्यादा शिकार होता दिख रहा हैं, जो देश के समक्ष चिंता का विषय हैं। भारत की आबादी 127 करोड़ को पार कर चुकी है, लेकिन देश में मोबाइल की संख्या भी उसका पीछा करती हुई प्रतीत हो रही हैं। देश में 2016 तक 105.92 करोड़ मोबाइल यूजर्स थे। अगर इसी रफ्तार में मोबाइल यूजर्स की तादाद बढ़ती रहीं, तो आने वाले वक्त में जनसंख्या से ज्यादा मोबाइल यूजर्स की संख्या देश में हो जाएगी।

क्योंकि ज्यादातर लोग एक से ज्यादा मोबाइल रखने लगे हैं। देश में 103.42 करोड़ वाई-फाई उपभोक्ता है। इसके साथ देश में लगभग 16 करोड़ लोग ब्रॉडबैंड के जरिए इंटरनेट का उपयोग करते है। यह कुछ ऐसे जादुई आंकड़े है जो यह बताते हैं कि देश में मोबाइल, स्मार्टफोन और इंटरनेट का इस्तेमाल दिन-ब-दिन कितनी तेजी से बढ़ता जा रहा हैं।

सेल्फी को लेकर कुछ पुराने आंकड़े दर्शित करते हैं कि विश्व में एडवेंचर सेल्फी की लत कैसे लोगों पर हावी हो रही हैं। 2016 तक प्रतिदिन 94 मिलियन सेल्फी विश्व पटल पर खींची जाती हैं। वर्ष 2013 में सेल्फी आॅक्सफोर्ड वर्ड आॅफ द इयर चुना गया। जो सेल्फी के क्रेज की दास्तां की बानगी पेश करता हैं।

एडवेंचर सेल्फी का शौक अपनी गलती और लापरवाही से जहाँ प्राणघातक होता है, इसके साथ मोबाइल फोन के अन्य नुकसान भी है। जो हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञों के मुताबिक चेहरे पर लगातार स्मार्टफोन की लाइट और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन से त्वचा को नुकसान पहुंचता हैं।

इसके साथ शोध में यह भी पाया गया है कि व्यक्ति जिस साइड से स्मार्टफोन यूज करता है उसका वह हिस्सा दूसरे हिस्से की बजाय ज्यादा प्रभावित होता है। इसके अलावा मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडिएशन श्रवण शक्ति संबंधी तकलीफों के साथ मानव मस्तिष्क पर भी घात करती हैं। एडवेंचर सेल्फी के प्रेमी अपने कौशल को अन्य क्षेत्र में लगाएं, और देश के विकास में साधक बनें।

इसके साथ देश की व्यवस्था को भी खतरनाक स्थलों पर मोबाइल पर प्रतिबंध आदि की व्यवस्था करें, जिससे सेल्फेरिया से होने वाली मौत में कुछ कमी आ सकें।

– महेश तिवारी

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